अगर दिखाई दे ये लक्षण तो समझ ले आपके पेट में कीड़े है

पेट के कीड़े: कीड़े शरीर में छिपा हुआ ऐसा रोग है जो कि ऊतकों में, अंग में और खून में पैदा होसकता है। पहले आपको बतादेकिपेट में कीड़ा कैसे विकसितहोता है। परजीवी या कीड़े कीश्रेणी में गोल, फीता कृमि इत्यादि शामिल है।ये परजीवी किसी भी आकार का होसकता है और कई प्रकारकीसमस्या उत्पन्न कर सकते हैं। कुछ कीड़े लाल रक्त कोशिकाओं कोअपना आहार बनाकर एनीमिया का शिकार बना देता है। शेष कीड़े आपके भोजन का उपभोग करते है। ये आपको भूखा रखते हुए, वजन बढ़ने से रोकता है। पेट के कीड़े से खुजली, चिड़चिड़ापन, और यहां तक कि अनिद्रा की समस्या का भी सामना करना पड़ता है।

पेट में कीड़े होने के लक्षण: –

कब्ज़ की शिकायत –
खाने का न पच पाना –
दस्त का होना –
खाना खाने के तुरन्त बाद मल का आ जाना –
मल में बलगम तथा खून आना –
पेट में दर्द तथा जलन –
गैस और सूजन का अनुभव –
बवासीर का हो जाना –
थकान होना –
अत्यधिक कमजोरी –
त्वचा रोग और एलर्जी कीड़े जो कि त्वचा में प्रवेश करते है, खुजली को जन्म देता है। जब ऊतकों को इन परजीवियों से सूजन होता है, तब श्वेत रक्तकोशिका शरीर कीसुरक्षा करना प्रारंभ करती है। यह प्रतिक्रिया त्वचा परचकत्ते का कारण बनती है। 

भंगुर बाल तथा शुष्क त्वचा –
त्वचा के नीचे सनसनी रेंगना –
दानेदार घाव –
धीरे सजगता –
निद्रा संबंधी परेशानियां –
नींद के दौरान दांत पीसना –
वजन और भूख समस्या –
मांसपेशियों और जोड़ों की शिकायत –
रक्त विकार –
यौन और प्रजनन समस्या –

सांस लेते समय मुसीबत इन कीड़ों से बचने के लिए कुछ मेडिकल परीक्षण तथा इलाज आवश्यक है। इन परीक्षणों के बीच परम्परागत अंडाणु और परजीवी स्टूल टेस्टबहुत महत्वपूर्ण है। अंडाणु और परजीवी स्टूल टेस्ट: परम्परागत मल परीक्षण आपके मल में परजीवी या परजीवी अंडे पहचान सकता है। इस परीक्षण की अभी भी कुछ सीमाएं है। इस परीक्षण में तीन अलग-अलग मल के नमूने की जाँच अति आवश्यक है। सभी नमूनों को सूक्ष्मदर्शी से जाँच के लिए चिकित्सक के पास भेजा जाना चाहिए। परजीवियों का एक बहुत ही अनोखा जीवन चक्र होता है जो उन्हें निष्क्रिय चीजों में भी जिंदारखता है।

इस पारंपरिक परीक्षण में उन्हें पहचानने के लिए, परजीवीजीवित होना चाहिए। ताकि चिकित्सक कीड़े से बचने के लिए उचित दवा दे सके। रोकथाम व घरेलू उपचार: – कद्दू के बीज, अंजीर और तिल के बीज का दैनिक तीन बार खाली पेट उपभोग करें। – केवल बोतल बंद मिनरल पानी पिएं। – चीनी, वसा, मांस, चिकन, भेड़ और सुअर का मांस उत्पादों उपयोग न करना। – परजीवी विनाशकारी शक्तियों के लिए अनानास खाएं। – भोजन के 30 मिनट पहले याबाद कुछ मात्रा में पपीता खाएं। – इस समय अंतरंग संबंध बनाने से बचें। – अंडरवियर, बिस्तर और तौलिये को प्रत्येक उपयोग के बादगर्म पानी में धो लें। – बार बार हाथ धोएं। – इस समस्या के दौरान कॉफी, शराब से बचें। – परजीवी विरोधी खाद्य पदार्थ जैसे कि सरसों के बीज खाएं। – सुबह खाली पेट छाछ लें। – दही के साथ पुराने नारियल लें।

नारियल का पाउडर बनाने के बाद उसे एक डिब्बे में रख दें। प्रत्येक दिन एक चम्मच नारियल पाउडर को एक कप दही में मिलाएं और दिन में तीन चार बार खाना खाने से पहले ले। यह तीन से चार दिन में हर प्रकार के कीड़े को निकाल देता है। खाली पेट खजूर खाना पेट के कीड़ों से बचने का सबसे बेहतरीन उपाय है। – अदरक पेट के कीड़े को मारने का प्राकृतिक स्त्रोत है।अदरक की चार-पांच पोथी छील लें। उन्हें छोटे टुकड़ों में काट कर शहद केसाथ मिला ले तथा कुछ मात्रा में काला नमक डालें। इससे बने घोल को दिन में कम से कम तीन बार मरीज को दे। – गाजर का जूस पिए। – ताजा आडू के टुकड़ों को नमक के साथ खाएं। ऊपर दी गई हुई सभी प्रक्रियाओं का

सावधानियां से प्रयोग कर आप पेट के कीड़ों से बहुत जल्द मुक्ति पा सकते हैं। सलाह व परहेज: – सब्जियों में चुकंदर, लहसुन, भिंडी, मटर, मूली, मीठे आलू, टमाटर, शलजम इत्यादि का प्रयोग करें। – फलों में केले, जामुन, चेरी, अंगूर, कीवी फल, नींबू, तरबूज, संतरा, पपीता, अनानास, आलू बुखारा, अनार की छाल और पत्तियों कासेवन करें। – औषधीय जड़ी बूटी में एंजेलिका, राख लौकी बीज, सुपारी, काले अखरोट हल्स, झूठी गेंडा, गोल्डन सील जड़ तथा अजवाइन का उपयोग करें। आप इन प्रक्रियाओं को अपना कर पेट के कीड़ों से छुटकारा पा सकते हैं तथा स्वस्थ जीवन व्यतीत कर सकते हैं।

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